Tomb of Ikhlas Khan (Roza)
1690 में बना Budaun का distinctive Mughal-era maqbara, जिसे स्थानीय रूप से Ikhlas Khan ka Roza कहा जाता है।
History, faith and local memory
Tomb of Ikhlas Khan, जिसे स्थानीय लोग "इखलास ख़ाँ का रोज़ा" कहते हैं, उत्तर प्रदेश के बदायूं (Budaun) जिले के जवाहरपुरी (Jawaharpuri) क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण मुगलकालीन मकबरा (Mausoleum) है। यह बदायूं के सबसे प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है।
इतिहास
इखलास ख़ाँ मुगल शासनकाल के एक प्रतिष्ठित नवाब थे। उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने उनकी स्मृति में यह भव्य मकबरा बनवाया। अधिकांश ऐतिहासिक स्रोत इसके निर्माण का समय लगभग 1690 ईस्वी (1094 हिजरी) बताते हैं, जबकि कुछ शोध इसे 1660 के दशक से भी जोड़ते हैं।
स्थापत्य कला
- यह मकबरा ऊँचे चबूतरे पर निर्मित है, जो इसे आसपास के क्षेत्र से अलग पहचान देता है।
- इसकी योजना वर्गाकार (Square Plan) है और प्रत्येक दिशा में इसकी लंबाई लगभग 152–153 फीट है।
- इसका निर्माण मुख्यतः लखौरी ईंटों (Lakhauri Bricks) और चूने के मसाले से किया गया है।
- चारों कोनों पर सुंदर मीनारें (Minarets) हैं, जिनके ऊपर छोटी-छोटी छतरियाँ (Chhatris) बनी हुई हैं।
- बीच में विशाल गुंबद और संतुलित मुगल स्थापत्य शैली इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।
मकबरे के भीतर
इस रोज़ा में कुल पाँच कब्रें हैं।
- नवाब इखलास ख़ाँ
- उनकी पत्नी
- उनके पुत्र शहवाज़ ख़ाँ
- दो अन्य व्यक्तियों की कब्रें, जिनकी पहचान आज भी निश्चित नहीं हो सकी है।
विशेष महत्व
- यह स्मारक मुगलकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
- इसकी सुंदर बनावट और गुंबद के कारण कई लोग इसे "बदायूं का मिनी ताजमहल" भी कहते हैं, हालांकि इसे ताजमहल जैसी प्रसिद्धि नहीं मिल सकी।
- यह बदायूं की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा इतिहास, वास्तुकला और पर्यटन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
संक्षिप्त तथ्य
विषयविवरणस्थानजवाहरपुरी, बदायूं, उत्तर प्रदेशनिर्माण काललगभग 1690 ईस्वी (1094 हिजरी)निर्माताइखलास ख़ाँ की पत्नीस्थापत्य शैलीमुगल स्थापत्यनिर्माण सामग्रीलखौरी ईंटें एवं चूने का मसालासंरक्षित स्मारकभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)कुल कब्रें5निष्कर्ष:
इखलास ख़ाँ का रोज़ा केवल एक मकबरा नहीं, बल्कि बदायूं के मुगलकालीन इतिहास, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसकी भव्य संरचना, ऐतिहासिक महत्व और शांत वातावरण इसे बदायूं के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल करते हैं।
Location on Google Maps
Mohalla Brahampur, Budaun

